स्वाध्याय

स्वाध्याय – सत्संग सतत करें अच्छे व्यक्तियों की संगति करने के लिए कुछ अन्य कार्य हर्ज करने पड़ें , पैसा खरच करना पड़े तो करना चाहिए क्योंकि यह हानि बीज रूप है , जो अंत में हजार गुनी होकर लौटती है । जो अपने जीवन को उच्च बनाना चाहते हैं , उन्हें चाहिए कि स्वाध्याय के लिए कुछ समय नित्य निकालें , श्रेष्ठ पुरुषों की उत्तम रचनाएँ जो ऊँचा उठाने वाली हों , नित्य पढ़ें । स्वाध्याय करना , घर बैठे सत्संग करना है । इसके अतिरिक्त उत्तम विचारवान , श्रेष्ठ पुरुषों के पास बैठने , उनसे प्रश्न पूछने , उनके आदर्शों और स्वभावों का अनुकरण करने का प्रयत्न करते रहना चाहिए । लोहे को सोना बना देने की शक्ति पारस पत्थर में होती है और पशु को मनुष्य बना देने की क्षमता सत्संग में पाई जाती है । पारस पत्थर अप्राप्य है , पर सत्संग की इच्छा करें तो उसे अपने समीप ही प्राप्त कर सकते हैं । ध्यान रखना चाहिए कि हमारे आस – पास बुरा प्रभाव डालने वाला वातावरण तो नहीं है , यदि हो तो उससे सावधान रहने और बचते रहना चाहिए । स्मरण रखना चाहिए कि जीवन को ऊँचा उठाने की शक्ति सत्संग में है । अतएव इसके लिए सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए । विद्वान वेकन का कथन ठीक है कि मनुष्य कोरे कागज के समान है । पतन और उन्नति बहुत कर निकटस्थ प्रभाव के ऊपर निर्भर है । इसलिए अपने को बुरे भावों से बचाने और अच्छे प्रभावों की छाया में लाने का सदैव प्रयत्न करते रहिए । -अखण्ड ज्योति मार्च 1944 , पृष्ठ -56 घर में देवमंदिर और ज्ञानमंदिर अवश्य बनें सामाजिक जीवन में आध्यात्मिकता एव धर्मभावना को प्रवेश करने के लिए जिस प्रकार सार्वजनिक देवमंदिरों की आवश्यकता है , उसी प्रकार पारिवारिक जीवन में सद्भावना और सत्प्रवृत्तियों को सुरक्षित रखने तथा बढ़ाने के लिए पारिवारिक देवमंदिरों की आवश्यकता होती है । भारतीय संस्कृति से प्रेम रखने वाले सद्गृहस्थों के घरों में अभी भी जहाँ – तहाँ छोटी देवपूजा की स्थापना दिखाई देती है । जिन घरों में नियमित पूजा , उपासना होती है , इसके लिए नियत कक्ष बने होते हैं , वहाँ अपेक्षाकृत बुराइयाँ घटती और अच्छाइयाँ बढ़ती जाती हैं । पाप , द्वेष , दुराचार , रोग – शोक , दुःख – दारिद्रय घटतें हैं और श्री , समृद्धि , उन्नति , सफलता एवं प्रसन्नता के कारण बढ़ते हैं । उपासना से उत्पन्न होने वाले शक्ति – कंपनों से ऐसा परिणाम होना सहज एवं स्वाभाविक है ।
युगऋषि के संदेश

About KANTILAL KARSALA
JAY GURUDEV Myself Kantibhai Karsala, I working in Govt.Office Sr.Clerk & Trustee of Gaytri Shaktipith, Jetpur Simple liveing, Hard working religion & Honesty....

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