चैत्र नवरात्रि गायत्री अनुष्ठान साधना 13 अप्रैल से 21 अप्रैल-2021

चैत्र नवरात्रि गायत्री अनुष्ठान साधना 13 अप्रैल से 21 अप्रैल-2021

संधिवेला , साधनावेला , अध्यात्मवेला , आत्मसात की वेला , सकारात्मक को बढाने की वेला

नवरात्रि की अवधी दिव्य अवधी इस विशेष अवधी में प्रकृति का ऐसा अनुग्रह बरसता है जिसका इंतजार सभी साधु संत महात्मा साधक गृहस्थ करते हैं

अमृत वर्षा का लाभ
जिस तरह बरसात के समय जो जितना बड़ा पात्र रखता हैं उतनी ही मात्रा में वरुण देव बिना भेदभाव के अपना अनुग्रह देते हैं
वैसे ही साधक जितना बडा अपने साधना स्वाध्याय संयम सेवा का पात्र इन दिनों रखता है उसी अनुपात बिना भेदभाव के आद्यशक्ति सविता का अमृत स्नेह शक्ति का त्रिवेणी लाभ साधक को प्राप्त होता हैं

इस दिव्य अवधी का लाभ सभी को उठाना चाहिए , भले ही कम हो या ज्यादा , मौका नही छोड़ना हैं …

इस महान वेला में हम साधक गुरु , गायत्री , गंगा , गौ और गीता को साध्य बना करके अपनी साधना का लक्ष्य पा सकते हैं :-

गुरु :- नौ दिन सिर्फ व सिर्फ गुरुसत्ता का पठन , पाठन , मनन , चिन्तन और ध्यान
गायत्री :- नौ दिनों में गायत्री का 24,000 मंत्र जप या 2400 मंत्र लेखन या 240 गायत्री चालीसा का अनुष्ठान
गंगा :- कलश की स्थापना
गौ :- गौघृत अखण्ड दीपक की स्थापना , गौ पंच गव्य का सेवन
गीता :- गायत्री महाविज्ञान का स्वाध्याय

गायत्री अनुष्ठान
गायत्री अनुष्ठान के अनन्त फायदे हैं , और वह जब नवरात्री में की जाती हैं तो उसका लाभ और कई गुना बढ़ जाती हैं ।

अनुष्ठान के सभी नियमों के पालन से अत्याधिक आध्यात्मिक ऊर्जा को ग्रहण किया जा सकता हैं
यह साधना की उत्तम दिव्य सन्धि हैं …

क्या करना हैं ?
संयम , साधना , स्वाध्याय और सेवा नियम :-

  • संयम:-*
    1) आहार :- पुर्ण शाकाहारी भोजन ; कम से कम अन्न का सेवन ; हो सके तो सिर्फ सिर्फ घर का ही भोजन का सेवन ; हो सके तो अस्वाद भोजन का सेवन ; हो सके तो सिर्फ व सिर्फ गौ दूध ; दही , घी , रस और जल का सेवन अधिक मात्रा में बिना प्यास के भी जल का सेवन …

2) तप जमीन / तख्ते पर सोना ; अपना काम खुद करना ;
3) ब्रह्मचर्य शारिरिक , मानसिक , वाचिक ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन
4) मौन हो सके तो पूरे नौ दिन मौन का पालन ; नही तो प्रतिदिन 1-2 घंटे का मौन ; कम से कम बोले , मीठा बोले , मुस्कुराते हुये बोले ; सत्य वाचा का पूर्ण पालन करे ; टेलीविजन और सिनेमा से दूरी ; सकारात्मक बाते ही चिंतन में लाये और करे
5) अहिंसा शरीर , मन और वाचा से किसी भी जीव को नही दुखाये

  • *साधना **
    1) जप रोजाना कम से कम तीन घण्टे का जप / गायत्री मंत्र लेखन / गायत्री चालीसा
    2) ध्यान रोजाना परम पूज्य गुरुदेव के साथ 30 मिनिट का ध्यान
    3) आत्मबोध उठते ही 5-10 मिनिट सविता देवता का ध्यान और पूरे दिनचर्या की रूपरेखा
    4) तत्वबोध सोने के पहले गुरुदेव और माताजी का ध्यान , अपनी गलतियों के लिए क्षमा और प्रणाम करते हुए अपने आप को गुरुचेतना में लीन
    5) नादयोग माताजी के साथ मे कम से कम 15 मिनिट का नादयोग
    6) गायत्री यज्ञ रोजाना घर पर 24 मंत्राहुति
    7) सामुहिक यज्ञ रविवार को गुरु भाई बहनों के साथ ऑनलाइन या ऑफलाइन यज्ञ
  • *स्वाध्याय **
    रोजाना कम से कम 1 घंटे का गायत्री महाविज्ञान या किसी एक गायत्री वांगमय का स्वाध्याय
  • *सेवा **
    रोजाना गायत्री प्रार्थना सभी की मंगल कामना के लिये अपनी साधना की आहुति

कैसे करना हैं ?
1) संकल्प 13-अप्रिल के ब्रह्म मुहूर्त में गुरुदेव और माताजी आवाहन और सान्निध्य में अनुष्ठान के लिए संकल्पित होना
2) पूर्णाहुति
21-अप्रैल को गायत्री हवन के साथ मे पूर्णाहुति ;
पूर्णाहुति में कम से कम अपनी एक बुराई का त्याग और एक अच्छाई का आत्मसात ;
3) दान अपने अंश समय प्रतिभा का दान समाजहित लोकहित के लिये

हम सब की नवरात्री साधना सफल हो उसके लिए गुरुसत्ता का मार्गदर्शन और आशीर्वाद बना रहे यही उनके चरणों मे प्रार्थना …
तस्मै श्री गुरुवे नमः

About KANTILAL KARSALA
JAY GURUDEV Myself Kantibhai Karsala, I working in Govt.Office Sr.Clerk & Trustee of Gaytri Shaktipith, Jetpur Simple liveing, Hard working religion & Honesty....

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: